बच्चा पढ़ रहा है, फिर भी Marks क्यों नहीं बढ़ रहे?
By Priyank Joshi (PJ Sir)
Educator & Mentor | 18+ Years of Teaching Experience
यह सवाल मुझे अक्सर parents से सुनने को मिलता है—“Sir, बच्चा पढ़ता तो बहुत है। रोज़ कई घंटे बैठता है, tuition भी जाता है, notes भी बनाता है, फिर भी marks क्यों नहीं बढ़ रहे?”
यह स्थिति केवल JEE या NEET aspirants की नहीं है। Class 6 से लेकर Board Exams और competitive examinations तक बहुत से students के साथ ऐसा होता है।
Parents को लगता है कि शायद बच्चा पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहा। Student को लगता है कि वह इतनी मेहनत कर रहा है, फिर भी result नहीं आ रहा। धीरे-धीरे दोनों frustrated होने लगते हैं।
लेकिन मेरे अनुभव में कई बार समस्या मेहनत की मात्रा में नहीं, मेहनत के तरीके
में होती है।
पढ़ना और सीखना एक ही बात नहीं है
एक student तीन घंटे किताब खोलकर बैठ सकता है, notes पढ़ सकता है और important lines highlight कर सकता है। इससे उसे महसूस होता है कि chapter तैयार हो गया।
लेकिन असली सवाल यह है:
क्या वह किताब बंद करके concept समझा सकता है?
क्या वह बिना notes देखे question solve कर सकता है?
क्या वह एक सप्ताह बाद भी वही concept याद रख पाएगा?
अगर जवाब “नहीं” है, तो student ने समय तो दिया है, लेकिन learning पूरी नहीं हुई।
इसीलिए मैं students से कहता हूँ:
Don't measure your preparation only by study hours. Measure it by what you can recall, apply and solve.
1. केवल Notes पढ़ने से Marks नहीं बढ़ते
बहुत से students का preparation cycle होता है:
Lecture → Notes → Reading → फिर नया Chapter
लेकिन बीच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा छूट जाता है—application.
किसी concept को समझने के बाद questions solve करना जरूरी है। जब student question में concept apply करता है, तभी पता चलता है कि उसे वास्तव में chapter समझ आया है या केवल पढ़ते समय आसान लग रहा था।
इसलिए बेहतर cycle है:
Learn → Recall → Practise → Test → Analyse → Revise
2. बच्चा अपनी गलतियों का Analysis नहीं कर रहा
Test में 60/100 आए।
अक्सर पहला reaction होता है:
“40 marks कहाँ चले गए?”
लेकिन इससे ज्यादा useful सवाल है:
“वे 40 marks क्यों गए?”
हर गलत question को केवल wrong answer मानकर छोड़ देना बड़ी गलती है।
Student को अपनी mistakes classify करनी चाहिए:
- Concept नहीं आया था?
- Formula/fact भूल गया?
- Question गलत पढ़ा?
- Calculation mistake हुई?
- दो options में confusion था?
- जल्दबाजी की?
- सही आता था लेकिन revision कमजोर था?
जब तक गलती का कारण नहीं मिलेगा, वही गलती अगले test में दोबारा होने की संभावना बनी रहेगी।
इसीलिए मैं Error Log रखने की सलाह देता हूँ।
हर test के बाद गलतियों को लिखिए और अगले test से पहले उन्हें एक बार जरूर देखिए।
Your mistakes should become your preparation roadmap.
3. Revision बहुत Late शुरू होता है
एक common mistake है:
“पहले syllabus पूरा कर लेते हैं, फिर revision करेंगे।”
लेकिन जब तक syllabus पूरा होता है, शुरुआती chapters का बड़ा हिस्सा कमजोर पड़ चुका होता है।
Revision syllabus खत्म होने के बाद शुरू होने वाली activity नहीं होनी चाहिए।
Revision और syllabus साथ-साथ चलने चाहिए।
उदाहरण के लिए:
आज नया topic पढ़ा।
अगले दिन उसका quick recall किया।
कुछ दिनों बाद questions लगाए।
फिर test में उसे दोबारा देखा।
ऐसी spaced revision लंबे समय तक retention बनाने में ज्यादा उपयोगी होती है।
4. Student Solutions देखकर Questions कर रहा है
यह habit विशेष रूप से Class 11–12 और JEE/NEET students में देखने को मिलती है।
Question देखा → 30 seconds सोचा → नहीं आया → solution खोल लिया।
Solution पढ़कर लगता है:
“अरे! ये तो मुझे आता था।”
यहीं भ्रम पैदा होता है।
Solution समझ आ जाना और solution खुद निकाल पाना अलग-अलग skills हैं।
Student को question के साथ struggle करने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए। गलत approach भी learning का हिस्सा है।
5. बहुत सारे Resources भी Problem बन सकते हैं
एक ही subject के लिए कई books, कई YouTube teachers, अलग-अलग notes और multiple question banks रखना हमेशा बेहतर preparation नहीं बनाता।
कई students preparation से ज्यादा resources collect करने लगते हैं।
Class 6–10 के student के लिए school/board material और एक अच्छी practice source अक्सर पर्याप्त base बना सकते हैं। JEE/NEET में भी core material, NCERT जहाँ relevant हो, structured question practice और PYQs को बार-बार करने का फायदा resource hopping से अधिक हो सकता है।
More resources do not automatically mean more learning.
6. Weak Chapters से बचने की आदत
जिस chapter में student अच्छा होता है, उसे बार-बार पढ़ना अच्छा लगता है।
जिस chapter में परेशानी होती है, उसे वह कल पर छोड़ देता है।
यही धीरे-धीरे बड़ा learning gap बन जाता है।
हर student को तीन categories बनानी चाहिए:
Strong | Average | Weak
और study timetable में weak topics के लिए deliberately समय रखना चाहिए।
Preparation का उद्देश्य केवल strengths को polish करना नहीं, weaknesses को कम करना भी है।
7. Parents केवल Marks पर बात न करें
यह हिस्सा बहुत महत्वपूर्ण है।
जब बच्चा test देकर घर आता है और पहला सवाल होता है—
“कितने marks आए?”
तो धीरे-धीरे बच्चे के लिए test का अर्थ केवल score बन सकता है।
कभी यह भी पूछिए:
“इस test से क्या नया पता चला?”
“सबसे ज्यादा गलतियाँ किस तरह की हुईं?”
“अगले test में कौन-सी तीन गलतियाँ repeat नहीं करनी हैं?”
यह conversation बच्चे को result से हटाकर improvement पर focus करने में मदद करती है।
कम marks को ignore नहीं करना है। Marks important हैं। लेकिन marks को diagnosis की तरह इस्तेमाल करना ज्यादा उपयोगी है, judgement की तरह नहीं।
एक Simple System अपनाइए
मैं students को preparation को इस cycle में देखने के लिए कहता हूँ:
Concept → Practice → Test → Error Analysis → Revision → Retest
अगर marks नहीं बढ़ रहे हैं, तो केवल study hours बढ़ाने से पहले इस cycle में देखिए कि break कहाँ हो रहा है।
किसी student का concept कमजोर होगा। किसी की practice कम होगी। कोई revision नहीं कर रहा होगा। कोई बार-बार वही mistakes repeat कर रहा होगा।
हर बच्चे की समस्या अलग हो सकती है, इसलिए solution भी diagnosis के बाद ही तय होना चाहिए।
Parents के लिए एक आखिरी बात
आपके बच्चे को केवल यह सुनने की जरूरत नहीं है कि—
“और मेहनत करो।”
कई बार वह पहले से मेहनत कर रहा होता है।
उसे यह समझने में मदद चाहिए कि—
“मेरी मेहनत का result क्यों नहीं आ रहा और मुझे अपने तरीके में क्या बदलना चाहिए?”
और students के लिए मेरा एक simple message है:
कम marks का मतलब यह नहीं कि आपकी मेहनत बेकार गई। लेकिन अगर हर test के बाद भी आपका तरीका वही रहता है, तो केवल ज्यादा मेहनत करने से परिणाम बदलना मुश्किल हो सकता है।
हर test को सिर्फ marksheet मत बनाइए।
उसे feedback बनाइए।
यही feedback धीरे-धीरे बेहतर preparation और बेहतर performance में बदल सकता है।
About the Author
Priyank Joshi (PJ Sir) is a Chemistry Educator and Mentor based in Kota, Rajasthan, with more than 18 years of teaching and mentoring experience. He teaches Physical, Organic and Inorganic Chemistry and mentors students preparing for JEE, NEET and other academic examinations.
His teaching approach focuses on conceptual clarity, systematic practice, mistake analysis and continuous improvement.
— Priyank Joshi (PJ Sir)
Educator & Mentor | Kota

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